Kaal Sarp Dosh Puja
"कालसर्प योग" सामान्यतः जन्म कुंडली के बाकी सात ग्रह राहु और केतु...
कालसर्प दोष पूजा | मंगल भात पूजा | महामृत्युंजय जाप | रुद्राभिषेक | नवग्रह शांति | पितृ दोष | 9+ वर्षों का अनुभव | 7 वर्ष गुरुकुल शिक्षा | संपूर्ण वैदिक विधि-विधान
धार्मिक एवं वैदिक अनुष्ठानों के प्रति पंडित प्रिंस गुरु जी की आस्था और रुचि बचपन से ही रही है। आपने माँ विंध्यवासिनी वैदिक गुरुकुल से 7 वर्षों तक वैदिक शिक्षा प्राप्त की, जहाँ संपूर्ण कर्मकांड एवं वैदिक ज्योतिष का गहन अध्ययन किया। गुरुकुल में प्राप्त ज्ञान के साथ-साथ आपने विभिन्न वैदिक अनुष्ठानों का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी प्राप्त किया।
पिछले 9+ वर्षों से पंडित जी देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए पूर्ण वैदिक विधि-विधान से पूजन एवं अनुष्ठान संपन्न करा रहे हैं। विशेष रूप से कालसर्प दोष पूजा, मंगल भात पूजा, महामृत्युंजय जाप, रुद्राभिषेक, नवग्रह शांति, पितृ दोष निवारण, दुर्गा सप्तशती पाठ, सत्यनारायण कथा, गृह प्रवेश, विवाह संस्कार, मुंडन संस्कार, नामकरण संस्कार सहित सभी प्रकार के वैदिक अनुष्ठानों में आपकी विशेष विशेषज्ञता है।
पंडित जी प्रत्येक पूजा को शास्त्रों के अनुसार संपूर्ण विधि-विधान, मंत्रोच्चार एवं संकल्प के साथ संपन्न कराते हैं, जिससे श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक संतोष एवं सकारात्मक परिणाम प्राप्त हों। आपकी सरलता, निष्ठा एवं वर्षों के अनुभव के कारण आज देशभर से श्रद्धालु उज्जैन पहुँचकर आपसे पूजा-अनुष्ठान करवाते हैं। उज्जैन की पावन नगरी में यदि आप किसी भी प्रकार की वैदिक पूजा, दोष निवारण या धार्मिक अनुष्ठान करवाना चाहते हैं, तो पंडित प्रिंस गुरु जी आपकी सेवा के लिए सदैव तत्पर हैं।
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"कालसर्प योग" सामान्यतः जन्म कुंडली के बाकी सात ग्रह राहु और केतु...
मंगल भात पूजा कुंडली में विद्धमान मंगल ग्रह की उग्रता को कम करने के लिए की जाती है।...
परेशानी वाली बात:- चंद्र-राहु या सूर्य-राहु की युति को ग्रहण योग कहते हैं। यदि बुध की युति राहु के साथ है...
पितृदोष और कालसर्पदोष का सबसे प्राचीन स्थान सिद्धवट घाट है यहीं पर पितरों को मुक्ति प्रदान होती है
हिंदू धर्मशास्त्रों के मुताबिक भगवान शिव का पूजन करने से सभी मनोकामनाएं शीघ्र ही पूर्ण होती हैं।
कुंडली पूजा कुंडली में विद्धमान ग्रहों की उग्रता को कम करने के लिए की जाती है।...
सनातन धर्म में प्राण प्रतिष्ठा का बहुत ज्यादा महत्व है. मूर्ति स्थापना के समय प्राण प्रतिष्ठा जरूर किया जाता है.
महामृत्युंजय मंत्र जप शास्त्रों और पुराणों में असाध्य रोगों से मुक्ति और अकाल मृत्यु.
ॐ कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने॥ प्रणत: क्लेशनाशाय गोविंदाय नमो नम:॥
मां राज राजेश्वरी बगलामुखी पूजन के द्वारा सभी शत्रु पर विजय एवं काम क्रोध आदि
दोषों की शांति और आध्यात्मिक संतुलन के लिए उपचारात्मक यज्ञ।
स्वर्णाकर्षण भैरव काल भैरव का सात्त्विक रूप हैं, जिनकी पूजा धन प्राप्ति के लिए की जाती है, यह हमेशा पाताल में रहते
ऋण मुक्ति पूजा एक हिंदू धार्मिक प्रथा है जिसमें ऋण बंधन से मुक्ति प्राप्त करने के लिए पूजा की जाती है।
दुर्गा जी को प्रसन्न करने के लिए जिस यज्ञ विधि को पूर्ण किया जाता है, उसे शतचंडी यज्ञ बोला जाता है।॥
वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार कुंडली में बनने वाले योग और दोष व्यक्ति के जीवन को प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करते हैं।
" अर्क विवाह से पुरुषों के विवाह में आ रहे समस्त प्रकार के दोषो से मुक्ति प्राप्त की जा सकती है|..."
राहु-केतु के अशुभ प्रभाव को शांत कर सफलता, मानसिक शांति एवं उन्नति प्राप्त करने के लिए यह पूजा की जाती है।...
पितृ दोष, अकाल मृत्यु दोष एवं विशेष कर्मजनित दोषों के निवारण के लिए यह वैदिक अनुष्ठान कराया जाता है।...
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